लद्दाख

 बढ़ती तैयारियों के साथ लगने लगा जैसे

पूरा होता हुआ कोई हसीन रोमांचक सपना ऐसे

मिलने वाले हैं उससे जिसका औरों से सुना करते थे

जिसके सपने भी हिमालय से भी ऊंचे दिखा करते थे

दीदार पहला कैसा रहेगा जैसा सोचा वैसा रहेगा

या होश उड़ जाने जैसा रहेगा

सभ्यता का जिसने पाठ पढ़ाया

उस पवित्र नदी के किनारे चलेंगे 

जल से उसके आचमन कर लेंगे

मिलन हमारा कितना अद्भुत होगा

आसमान भी हर क्षण रंग बदलेगा

रूखी भूरी धरती, रूखे दैत्य पहाड़ 

दर दर्रो का डेरा, ठिठुरता रेगिस्तान "लाद्दाख"

मिलने वाले है जल्द तुमसे हिमालय के पार


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