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पंछी का मन

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 एक पंछी का मन  बड़ा मुश्किल है समझना अकेले बैठा डाल पर बड़ा अस्थिर विचलित विचारों का सैलाब लिए व्याकुल डोलता रात भर मन ही मन, नगरी नगरी और जब उड़ता है डैने हांकते झुंड बनाकर या अकेले होता है कितना स्थिर एकाग्रचित्त, तनावमुक्त तन से थका हुआ मगर   जाग्रत मन से सोता है..  
एक सपना पूरा होकर कई सपनो की राह रोक देता है जैसे कोई बहुत प्रेम करता है  तो किसी और को प्रेम नही करने देता आजाद होने के लिए लड़ता हैं आजाद होकर कितना गुलाम हैं ये पता चलता है घर की खुशियों के लिए दूर निकल जाता हैं घर और खुशियां दोनो से बहुत दूर चला जाता है ये पता चलता है
 मैं हूं बस एक किरदार ये कायनात मुझे जी रही है जहां से सब रास्ते पर था वहीं से रास्ते मोड़ रही है थोड़ी खुशियां लिखती है फिर थोड़े आंसू जोड़ रही है मैं हूं बस एक किरदार यहां  ये कायनात मुझे जी रही है थोड़ा थोड़ा करके वो हर रोज बहाने ढूंढ रही है कहीं किसी टेबल पर बैठी मेरी कहानी लिख रही है मैं हूं बस एक किरदार यहां  ये कायनात मुझे जी रही है

प्रेम में उल्टियां

     कभी कभी नए लोगो से मिलकर कुछ नए ज्ञान मिलते हैं जिनसे हम इतने अनजान होते हैं या सोचते रह जाते हैं कि जीवन में इतना घूम फिर कर भी ये बात क्यों नहीं सोची। किसी गहन बात पर चर्चा चलते हुए अचानक एक मित्र ने कहा " प्यार वो होता है जो समय पड़ने पर आपकी उल्टियां भी साफ कर सके " और भी कई बातें कहीं मगर कुछ दिनों से यही लाइन दिमाग में टनटना रही है। पहले तो उनकी बातों के कॉन्टेक्स्ट में ये बात घुलाने की कोशिश की, फिर भी पता नही क्यों ये किसी मिश्रण में अशुद्धि की तरह बार बार ऊपर की ओर तैरने लगता है। प्यार में उल्टियां साफ करना इसका क्या इंप्लीकेशन होगा। मान लीजिए मुझे उल्टी आ रही हो तो मैं पहले तो बेसिन या नाली की ओर भागूंगी या मेरे अलावा कोई भी हो यही करेगाा या मेरी स्थिति इतनी खराब होगी कि मैं अपने जगह से उठ ही नही पाई और मैने वही पर फैलाने का फैसला कर लिया तो कौन साफ करेगा? हां वो जो प्यार करता है वो तो जरूर करेगा जैसे मेरी मां, बहन, पापा, भाई (शायद वो दुष्ट नही करेगा और मेरी छोटी बहन भी न नुकुर करेगी फिर कुछ चारा न देख कर ही देगी)। और कौन करेगा? मेरी हेल्पर (काम वाली) जर...

इंतजार

 देखा मैने समुंदर को  जब लहरे खनखनाती हुई आती और सिमट जाती थी देखा मैने घाटों को  जब सीढ़िया सुंदरतम और धाराएं सरलतम बहती थी देखा मैने चट्टानों को  जब समृद्ध हरे वनों से भरे और तन कर खड़े होते थे देखा मैने आसमान को जब शाम ढलती थी और टिमटिमाते चांद तारे थे बस तभी प्यार हो गया प्रलय करते सागर, बाढ़ के बाद घाट, तपती टूटती चट्टाने, और आग उगलते आसमान को देखा ही नहीं था फिर ये भी देखा, प्रेम करने की कोशिश भी की प्रेम हो न पाया मगर प्रेम खत्म भी ना हुआ बस इंतजार में रहा  सबकुछ सामान्य होने तक

लद्दाख

 बढ़ती तैयारियों के साथ लगने लगा जैसे पूरा होता हुआ कोई हसीन रोमांचक सपना ऐसे मिलने वाले हैं उससे जिसका औरों से सुना करते थे जिसके सपने भी हिमालय से भी ऊंचे दिखा करते थे दीदार पहला कैसा रहेगा जैसा सोचा वैसा रहेगा या होश उड़ जाने जैसा रहेगा सभ्यता का जिसने पाठ पढ़ाया उस पवित्र नदी के किनारे चलेंगे  जल से उसके आचमन कर लेंगे मिलन हमारा कितना अद्भुत होगा आसमान भी हर क्षण रंग बदलेगा रूखी भूरी धरती, रूखे दैत्य पहाड़  दर दर्रो का डेरा, ठिठुरता रेगिस्तान "लाद्दाख" मिलने वाले है जल्द तुमसे हिमालय के पार
आधी आबादी ने जाना ही नही आधी आबादी के मर्म को आधी आबादी ने महसूस भी नही किया आधी आबादी पर क्या बीतती है जब बगल बैठे अंकल या दादा जैसे कहीं भी छू जाते हैं दूसरी दिशा में देखते हुए जब अंधेरे रास्ते से गुजरते हुए, छूट भईए जैसे घूरते हैं फूंकते हुए बीड़ी सिगरेट या सूंघते हुए मैं बताती हूं ! कि सपनो में उड़ता मन, अचानक तन पर आ गिरता है मैं बताती हूं! तब किसी अनहोनी की कल्पना से दिल सहम जाता है मैं बताती हूं! कि धड़कने रूक जाती हैं गला रूंध जाता है मैं बताती हूं फिर या तो असंख्य चुप्पियां या तमाशे बनते है। आप कहेंगे कि कपड़े छोटे थे  आप कहेंगे रात ज्यादा थी आप कहेंगे अकेली क्यों थी आप कहेंगे बायोलॉजी भी कुछ होती है सब व्यर्थ होगा जब उस जगह आप होंगे व्यर्थ है मेरा कहना क्योंकि आप नही हो सकते सब व्यर्थ होगा क्योंकि इतिहास से नही सीखा आपने व्यर्थ होगी आजादी जब युद्ध और दंगो में स्त्रियां लूटी जायेगी। ©Neelam