पंछी का मन

 एक पंछी का मन 

बड़ा मुश्किल है समझना

अकेले बैठा डाल पर

बड़ा अस्थिर विचलित

विचारों का सैलाब लिए

व्याकुल डोलता रात भर

मन ही मन, नगरी नगरी

और जब उड़ता है डैने हांकते

झुंड बनाकर या अकेले

होता है कितना स्थिर

एकाग्रचित्त, तनावमुक्त

तन से थका हुआ मगर  

जाग्रत मन से सोता है..





 

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