इंतजार

 देखा मैने समुंदर को 

जब लहरे खनखनाती हुई आती और सिमट जाती थी

देखा मैने घाटों को 

जब सीढ़िया सुंदरतम और धाराएं सरलतम बहती थी

देखा मैने चट्टानों को 

जब समृद्ध हरे वनों से भरे और तन कर खड़े होते थे

देखा मैने आसमान को

जब शाम ढलती थी और टिमटिमाते चांद तारे थे

बस तभी प्यार हो गया

प्रलय करते सागर, बाढ़ के बाद घाट, तपती टूटती चट्टाने, और आग उगलते आसमान को देखा ही नहीं था

फिर ये भी देखा, प्रेम करने की कोशिश भी की

प्रेम हो न पाया

मगर प्रेम खत्म भी ना हुआ बस इंतजार में रहा 

सबकुछ सामान्य होने तक

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