काम अभी बाकी है
माना कि दिन ढल गया, मगर रोशनी अभी बाकी है,
कर लूं मेरे अधूरे काम की जिंदगी अभी काफी है।
सफर किए हैं कई मगर मंजिले मिलनी अभी बाकी हैं,
माना कि शाम ढल गई, मगर रोशनी अभी काफी है।
गुजरे कइयों के ज़माने इन आंखो के आगे _२
मगर जो होगा हमारा, वो आना अभी बाकी है।
कई पन्ने फाड़े हैं तुमसे कुछ कहने से पहले_२
पर वो बात जबां पर आयी नहीं,
उसे आना अभी बाकी है।
लिखना चाहती हूं बहुत कुछ, कलम में वो ताकत लाना अभी बाकी है।
जो अब तक लिखा वो ग़ज़ल थी_2
गदर लाना अभी बाकी है।
मुक्कमल मुकाम पाने से पहले, यादों में गुम जाने से पहले,
तुम्हे बताना बाकी है कि तुममें भी वो आग लाना बाकी है।
माना कि अब शाम भी डाल गई है मगर पूरी रात अभी बाकी है।
घाव कई दिये हैं गैरो ने अभी तो अपनो के घाव बाकी हैं,
जो समय गुजर गया वो वक्त था, मेरा दौर आना अभी बाकी है
रात भी खत्म हो जाए तो क्या! सांसे तो अभी बाकी है,
कर लू मेरे अधूरे काम की आखिरी सांस भी काफी है।
❤️
ReplyDelete😊
DeleteWow...“Poetry comes from the highest happiness or the deepest sorrow.”��
ReplyDeleteAgree😊
Delete