दुनियां के दर्जी
पंख तो बराबर दिए होंगे उसने
मगर खोलने से पहले उन्हें
काट देते हैं, ये दुनिया के दर्जी
करीने से नापकर, निशान लगाकर
पहले नापते है मेरे डगो को
घर से निकलने से पहले
फिर मेरे चलने और हसने से
नापते हैं मेरा चरित्र
मेरे हुनर और लगन पर
अपनी हसरतों की कैची चलाते हैं
फिर नज़रों की सूई हर ओर चूभो कर
एक लिबास तैयार करते हैं
खबरदार! कोई और लिबास जो पहना तो
बेपर्दा कर देंगे ये दुनिया के दर्जी.
Comments
Post a Comment