बारिश और तुम

भीगे बस्तों के भारीपन का एहसास न था
बस तेरा नाम लिख कश्ती तैराने में सारा अरमान था मेरा।
यूनिफॉर्म पर कीचड़ के छींटो का ग़म न था,
तुम्हे दिखाने नए कपड़ों में स्कूल आने का वो जुगाड़ था मेरा।
किताबे जो भीगी थी मेरी दिल उसमें परेशान न था
कॉपी जो तुझसे मांगी थी, उसे अभी न लौटाने का प्लान था मेरा
बारिश की वजह से जो जल्दी छुट्टी हुई थी, उसका भी ग़म था,
मगर बारिश में तुम्हारे संग भीग जाने का एक ख्वाब था मेरा।
मै ये सब तुमसे कह न सकी तब इसका अफसोस नहीं,
मगर चुपके से जो तुमने बोर्ड पर लिखकर मिटाया था,
बस उसे पढ़कर मुस्कुराने का अरमान था मेरा।

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