श्यामल तरंग 9 aug 2020

अबकी सावन में सखी
रंग गए मन के कोर,
भीगे उनके प्रेम में
बचा ना कोई छोर।
मनवा उड़ता मेह संग
नाचे अंग उमंग,
हम ढूंढे उनको मेघ में
जब मन में उठे तरंग,
उड़ बदरा संग चल दिए
उनके हिय के श्यामल रंग।
नदी ताल भरते चले
संग चलती पवन मलंग
घुमरि घुमरि ढूंढा करे
वे प्रिय के हिय का ठौर,
उमड़ घुमड़ पूछे पता
बहुत मचाये शोर
प्रिय खड़ी सोचा करे
भरि भावन में सरबोर
नींद ना अखियन रात भर
अबकी सावन चितचोर
भरे प्रीत की सागर से
भिगो गए अंतर्मन
कहते संदेशा प्रेम का
मोहे रंग गए श्यामल रंग।


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