कभी कभी नए लोगो से मिलकर कुछ नए ज्ञान मिलते हैं जिनसे हम इतने अनजान होते हैं या सोचते रह जाते हैं कि जीवन में इतना घूम फिर कर भी ये बात क्यों नहीं सोची। किसी गहन बात पर चर्चा चलते हुए अचानक एक मित्र ने कहा " प्यार वो होता है जो समय पड़ने पर आपकी उल्टियां भी साफ कर सके " और भी कई बातें कहीं मगर कुछ दिनों से यही लाइन दिमाग में टनटना रही है। पहले तो उनकी बातों के कॉन्टेक्स्ट में ये बात घुलाने की कोशिश की, फिर भी पता नही क्यों ये किसी मिश्रण में अशुद्धि की तरह बार बार ऊपर की ओर तैरने लगता है। प्यार में उल्टियां साफ करना इसका क्या इंप्लीकेशन होगा। मान लीजिए मुझे उल्टी आ रही हो तो मैं पहले तो बेसिन या नाली की ओर भागूंगी या मेरे अलावा कोई भी हो यही करेगाा या मेरी स्थिति इतनी खराब होगी कि मैं अपने जगह से उठ ही नही पाई और मैने वही पर फैलाने का फैसला कर लिया तो कौन साफ करेगा? हां वो जो प्यार करता है वो तो जरूर करेगा जैसे मेरी मां, बहन, पापा, भाई (शायद वो दुष्ट नही करेगा और मेरी छोटी बहन भी न नुकुर करेगी फिर कुछ चारा न देख कर ही देगी)। और कौन करेगा? मेरी हेल्पर (काम वाली) जर...
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