अधूरे चेहरे
छह महीने कारागार जैसी जिंदगी जीने के बाद किसी तरह मौका मिला अपने दोस्तो, रिश्तेदारों, सहकर्मियों से मिलने का, लेकिन मारे खुशी में सबके चहरे पर लगे काले, पीले, हरे मास्क का तो खयाल ही नहीं था। हम सोच रहे थे कि जिंदगी पहले जैसी हो जाएगी। मगर ये मास्क, इसने तो बहुत कुछ बदल दिया। लोगो ने इसके साथ जीना सीख लिया और हमने उनके अधूरे चेहरों के साथ। जो हंसते, मुस्कुराते, रौबीले और शर्मीले चेहरे हम छोड़ के तालेबंदी में घर चले गए थे उन्हें अभी तक ढंग से देख भी नहीं पाए हैं। सामने तो वे रोज़ ही आते हैं मगर अधूरे से। हां! उनकी आंखे सब बयान करने की कोशिश करती हैं मगर ना वो ना हम, अभी इतने पारंगत हुए हैं कि आंखो - आंखो में सब समझ जाए। कुछ लोगों को आराम भी है उन्हें अब छद्म और झूठी मुस्कुराहट देने से छुटकारा मिल गया है वे खुश हैं अपने नए मित्र मास्क के साथ। वे भी खुश हैं जो चाह कर अनुचित जगह पर अपनी बत्तीसी दिखाने से खुद को नहीं रोक पाते थें अब उन्हें लाज नहीं आएगी ऐसा करने के बाद। बुदबुदा कर गाली देने वाले, चलते फिरते खुद से बाते करने वाले और खोए खोए मुस्कुराने वालो के लिए मास्क वरदान है जो उन्हें खुलकर जीने का मौका दे रहा है। मगर कुछ लोग परेशान भी हैं जैसे आधे बरस से अपने प्रिय के मुखड़े जो ना देख पाए थे, अब भी बस आधा ही देख पा रहे। वो मुस्कुरा भी दे तो भी पता नहीं चल पा रहा। अब तो कहावत " हंसी तो फंसी " भी काम नहीं आ रहा। सबसे कंफ्यूज चश्मेधारी लोग हैं जो चश्मे और मास्क के सीमाक्षेत्र का निर्धारण करने में ही परेशान हैं, कभी चश्मा, मास्क पर कभी मास्क, चश्मे पर चढ़ जाता है और परिणाम स्वरूप लेंस पर कुहासा सा छा जाता है। उससे भी ज्यादा परेशानी में लिपस्टिक की शौकीन हम लड़कियां हैं जो रोज़ जल्दी जल्दी में भूलकर लिपस्टिक लगा लेेती हैं फिर याद आते ही उसे पोछ - पाछ कर डिजाइनर मास्क लगाकर ही संतोष करती हैं, आदतें हैं जाने में टाइम लगेगा। इन सबमें जिसे सबसे ज्यादा फायदा होगा वो हैं, 'आंखे '। उन्हें पूरा मौका मिलेगा इस समय में अपना हुनर दिखाने का बिल्कुल बॉलीवुड गीतों की तरह " आंखे भी होती है दिल की जुबां, बिन बोले, कर देती हैं, हालत ये पल में बयां "। तो पारंगत करिए आंखो को, थोड़ा अधूरापन तो जाता रहे।

Very nice
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