वहीं खिंचा आता है...

हिचकियां नहीं आती हैं प्रेम में 
शांत मन में प्रेम हिलोरे उठाता है
पाकर एकांत में हमे, कभी
मन से मन में संवाद रचाता है
कभी बिन बात की मुस्कुराहटों में 
उनके होने का एहसास करवाता है
जिस्म बैठा हो टोले में मगर
दिल वहां से दूर ले जाता है
किसी कोने में दिल के
एक नन्हा सा घोसला बनाता है
उड़ता रहे दिन दोपहर, 
शाम वहीं खिंचा आता है..

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