जाने कितने तराने रचे जा रहे हैं
पन्ने यूं ही तुमसे भरे जा रहे हैं
कहां उलझी हो सुलझाने स्वेटर के फंदे
यहां तुम पर फसाने बुने जा रहें हैं
जाने कितने रूप धरे हैं तुमने
तुम पर कसीदे गढ़े जा रहे हैं
नजर नजर का फेर है सारा
कहीं खुशबू कहीं गलीजे भरे जा रहे हैं
जितनी सफेदी भरी तुमने पोशाक में
उतने छींटे उभरते चले जा रहे हैं
देख तू खामोश ये सारा मंजर
करने वाले तमाशे खुद लुटे जा रहे हैं
कहां उलझी हो सुलझाने स्वेटर के फंदे
यहां तुम पर फसाने बुने जा रहे हैं
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