मां होना
मातृ दिवस पर आज दो ऐसे पोस्ट देखे जो याद रह गए क्योंकि वे हट कर थे या मेरी सोच के करीब थे एक तो खुश्बू दी का लिखा " एक स्त्री को केवल मातृत्व तक सीमित कर देना पितृसत्तात्मक सोच का ही परिचायक है" और दूसरा राकेश सर का पोस्ट " मातृ दिवस का मूल मातृत्व की भावना" । दोनो में भारी गहराई है। और लोगो की पोस्ट पढ़ी तो वही घिसे पिटे विचार मिले जैसे- मां जैसी कोई नही, मां जैसी कोई हो ही नही सकती, मां खुशियों का संसार, स्त्री का सबसे बड़ा गुण मां होना, स्त्रीत्व मतलब मातृत्व।
आज से नहीं आदिम काल से स्त्री को मातृ देवी बना दिया गया। देवी वो भी "प्रजनन की देवी" और उसकी वहीं तक सीमा बना रही आधुनिक काल तक। अब उत्तर आधुनिक काल में स्त्रियों को लेकर कई धारणाएं बदल रही है तो मां होना क्या है इसे भी समझना होगा। पहले जो कहा गया लिखा गया वो पहले की बात रही। मानव की संज्ञानात्मक क्षमता हमेशा बढ़ती रही है तो चीज़ों की परिभाषा पुरानी कैसे स्वीकार करे।
कभी बैठकर सोचेंगे तो पता चलेगा इसी दुनिया में इसी जन्म में हम कई बार पैदा होते हैं। एक स्त्री जिसने हमें इस शरीर के साथ जन्म दिया उसकी कोई तुलना नही। लेकिन हमारे विचार, हमारी दक्षता, हमारे आत्मविश्वास को तराश कर जिन लोगो ने हमे नए रूप दिए एक नई दुनिया में फिर से जन्म दिया उनमें भी मुझे थोड़ी सी मां दिखती है। मातृत्व केवल मां का नही प्रकृति का गुण है और प्रकृति से कोई भी कुछ भी ग्रहण कर सकता है। लोग बहस करते हैं कि जन्म देने वाली मां बड़ी है या पालने वाली? मैं सोचती हूं ना जन्म देने से न पालने से, कोई मां नही बनता। मां बनता है मातृत्व की भावना से। एक पुरुष भी मां हो सकता है, एक किन्नर भी मां हो सकता है। सभी के उदाहरण हमारे आस पास ही मौजूद है। इसके अलावा एक जानवर भी आपको वो एहसास दे सकता है अगर आप महसूस कर पाए। स्त्रियों को तो मां बनने के लिए समाज ने जबरदस्ती का कॉपीराइट दे रखा है धीरे धीरे उनके जीन में ही ये उत्परिवर्तन हो गया होगा की उनमें तो मातृत्व के गुण होने ही होने चाहिए। मगर ऐसे भी उदाहरण देखे हैं मैंने जहां 4 बच्चे पैदा करने के बाद भी कुछ स्त्रियों में ये भाव आया ही नहीं और कहीं तो बिना संतान वाली स्त्रियों में इतना मातृत्व देखा कि उसकी कोई तुलना नही। कुल मिलाकर ये एक गुण है जो प्रेम की भावना से ही उत्पन्न होता है। समाज ने ही सीमाएं तय कर दी थी की पुरुष को बाप होना है और स्त्री को मां जबकि जन्म देना एक बायोलॉजिकल प्रक्रिया है उसका जिम्मा स्त्रियों पर है मगर मां होने का कॉपीराइट केवल स्त्रियों का नही है।
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